कुछ देर से पास खेलते हुए एक बच्चे को देख रहा हूँ|मेरा बेमकसद बैठे रहने का मन कहिये या उस प्यारे से बच्चे की मासूमियत में एक अजीब सा खिंचाव,कि पिछले एक घंटे में उसे निहारने के अलावा कुछ और नहीं किया है मैंने |हर छोटे बच्चे की तरह वो भी कुछ न कुछ ऐसा किए जा रहा है जिसको करने की वजह अगर उससे पूछी जाये तो अपने माँ के दामन में जा छिपने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं कर पायेगा शायद |बचपन की ये सबसे खास बात लगती है मुझे | इसमें कुछ भी करने की वजह नहीं होती | यह आज़ाद होता है |ठीक किसी परिंदे की तरह जो बस बेहिसाब उड़ता चला जाता है जब तक उसका मन चाहे |कभी किसी डाल पर बैठ सुस्ता लेता है,फिर पंख फडफडा एक अंगड़ाई लेता है और कुछ देर में फिर एक बार तैयार हो जाता है उड़ने के लिए |बचपन मासूम ज़रूर है लेकिन जिद्दी भी कम नहीं |जिस चीज़ पर दिल मचल गया बस वही आँखों के सामने छाई रहती है | न कोई मंजिल होती है उसकी, न उसे पाने की जद्दोजेहद | ये बस पेड़ से गिरे उस हलके से मुलायम रूई के फाए की तरह है जो बेवजह इधर से उधर, उड़ता या लुढकता फिरता है |
भले ही आज हम सबकी शक्ल बचपन से कुछ अलग ज़रूर दिखती हो लेकिन चेहरे पर आते हाव भाव आज भी कुछ कुछ वही पुराने हैं | आखिर नींव तो वही है न, जिसपर उम्र की इस इमारत को खड़ा किये जा रहे हैं साल दर साल | मेरा अपना ही बचपन लीजिए, जो आजतक मेरी यादों में ताज़ा है | ये कहना गलत नहीं होगा कि जिंदगी के सफर का सबसे खूबसूरत वक्त रहा है वो |ऐसा क्यों कह रहा हूँ,इस बारे में तो ऊपर की पंक्तियों में ही इतना लिख चुका हूँ कि अब शायद आपको समझाने की ज़रूरत ही नहीं |बस मलाल सिर्फ इस बात का है कि हर अच्छी चीज़ की तरह ये बचपन भी बहुत कम समय के लिए ठहरा |अभी तो ठीक से खुश भी नहीं हो पाए थे कि आया और चला भी गया |कभी कभी लगता है कि आम इंसानों के मुकाबले चौगुनी रफ़्तार से बड़ा हो गया |कम से कम दिखने में तो बड़ा लगने लगा हूँ |उड़ान भरने से पहले घंटों सोचना पड़ता है,और सोच ही सोच में इतना उड़ लेता हूँ कि और उड़ने की हिम्मत ही नहीं रहती |पर दिल के किसी कोने में आज भी मुलायम रूई में ढंका एक बच्चा ज़रूर है जो बड़ों की इस दुनिया से कुछ दूर मायूस सा बैठा दिखाई देता है |
2 comments:
Bachpan bhale hee choot gaya ho peeche par bachpana tumhara nahi gaya abhi :-) Keep it up and keep admiring children...finally you agree
ya dear, i also believe that there is a kid inside u,,i have feel and faced it when u need something to do,, u just do it, tum bade ho lekin, bachhe ki tarah ziddi bhi ho,, aur ye tumhe bhi pata he ki tumhe ye khud ke bare me ,, kud ke liye pasand he,, aur hamesha pasand rahega,,
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