अक्सर लोगों को कहते सुना है कि लिखने के लिए किसी खास किस्म का माहौल होना चाहिए, पर मुझे तो लगता है कि अगर लिखने का मन करे तो माहौल के हिसाब से कलम चलने लगती है और आज कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हो रहा है |शायद तभी तो वो बहुत रूक रूककर चल रही है और लिखावट भी कुछ टूटी सी दिख रही है |नहीं मालूम कि ये मांसपेशियों की अकड़न है या दिमाग या बाकी बदन के हिस्सों में होती तालमेल की कमी |ऐसा कभी पहले महसूस नहीं किया जब दिल, दिमाग और बदन के बाकी हिस्से, सब अपने अपने हिसाब से चलने लग जायें | बहुत कोशिश करके सबको इकठ्ठा किया है ताकि ये सांसें आती रहे | चारों ओर लोग ज़रूर नज़र आ रहे हैं, लेकिन पता नहीं क्यों बहुत सन्नाटा सा महसूस हो रहा है | हर बीतते पल के साथ ये और गहराता भी जा रहा है | न मालूम कब तक इस सन्नाटे से कभी न खत्म हो पाने वाली ये जंग लड़ता रहूँगा |
बचपन में अक्सर बच्चों के साथ छुपन छुपाई का खेल खेलना बेहद पसंद था मुझे | मुझे ढूँढने वाले को अचानक चौंका कर धप्पा कर देना और उसको दोबारा आँख बंद करने पर मजबूर कर देना, जब तक कि मैं फिर से न छिप जाऊं मुझे बहुत पसंद था | नहीं मालूम था कि बचपन की मासूमियत में खेले जाने वाला ये खेल पूरी जिंदगी मेरे साथ यूहीं चलता रहेगा | आज जिंदगी नें मुझे ही धप्पा कर दिया | पता ही नहीं चला कि कब जिंदगी नें दबे पांव मुझे कुछ ऐसा चौंका दिया कि कुछ पल को तो कुछ समझ ही नहीं पाया | यूं तो ये पहली बार नहीं जब जिंदगी नें अचानक मुझे इस तरह चौंकाया लेकिन इस बार कोफ़्त इसलिए कुछ ज्यादा है क्यूंकि लग रहा था कि इस बार तो जीत ही जाऊंगा और जब आप जीतने वाले हों, और ठीक उसी समय आप को हार से रूबरू होना पड़े तो इतनी कोफ़्त होना तो लाज़मी है | लेकिन मैं भी कम जिद्दी नहीं हूँ, तो क्या हुआ, अगर इस बार जिंदगी फिर जीत गयी और मैं हार गया | मैं तो तब तक इसी तरह इस खेल को खेलता जाऊंगा जब तक कि जिंदगी को चौंका कर उसे ही न हरा दूं |
जिंदगी ज़रूर मुस्कुरा रही होगी आज मुझे यूं बेबस देखकर, मेरी मांसपेशियों में होती अकड़न और मेरी टूटती लिखाई देखकर | सन्नाटा गहरा ज़रूर है लेकिन मुझे यकीन है कि कुछ देर तक इसी तरह अंधेरों को टटोलते टटोलते कुछ आवाजें ज़रूर सुनाई देंगी मुझे और सन्नाटा छटेगा | अगर इस सन्नाटे से निकल पाया तो यकीनन पूरे जोश के साथ इस बार जिंदगी को मैं चौकाऊंगा | और क्यूंकि इससे निकालने में मेरा खुदा खुद साथ दे रहा है इसलिए शायद इस बार जिंदगी की डरने की बारी है | कम से कम एक बार ही सही मैं भी उसे धप्पा कर देना चाहता हूँ और इस बार उसकी बेबसी को देखकर खुद सुकून महसूस करना चाहता हूँ |
No comments:
Post a Comment